युद्ध हो या आपदा – हर भारतीय की सुरक्षा सर्वोपरि प्रकाशित तिथि: 05 मार्च 2026 लेखक: दयानंद झा

जब भी दुनिया के किसी हिस्से में युद्ध, आतंरिक संघर्ष या आपदा की स्थिति बनती है, विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन जाती है। हाल के वर्षों में पश्चिमी एशिया के कई देशों में बिगड़ते हालात के बीच भारत सरकार ने त्वरित निर्णय लेकर वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की।

संकट की घड़ी में त्वरित कार्रवाई

पश्चिमी एशिया में तनाव बढ़ते ही भारतीय दूतावासों को अलर्ट पर रखा गया। एयरस्पेस बंद होने जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत ने इंतजार नहीं किया। विशेष उड़ानों की व्यवस्था की गई और ज़रूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों से निकासी की योजना बनाई गई।
विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से राहत अभियान तेज़ी से चलाया गया।
3 वर्षों में 6,000 से अधिक भारतीयों की सुरक्षित वापसी
पिछले तीन वर्षों में संकटग्रस्त देशों से लगभग 6,000 भारतीयों को सकुशल स्वदेश लाया गया।

इनमें शामिल थे:

छात्र
प्रवासी कामगार
व्यवसायी
तीर्थयात्री
वापसी के बाद भी आवश्यक सहायता और आगे की यात्रा की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

मजबूत नेतृत्व की झलक

Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार ने स्पष्ट किया है कि दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाला भारतीय अकेला नहीं है।
त्वरित निर्णय क्षमता, कूटनीतिक सक्रियता और समन्वित रणनीति ने यह साबित किया है कि संकट की घड़ी में भारत अपने नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ा रहता है।
भारत की वैश्विक साख मजबूत
विदेशों से नागरिकों की सुरक्षित वापसी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को और सशक्त किया है। यह दिखाता है कि भारत एक जिम्मेदार और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।

युद्ध हो या आपदा — हर भारतीय की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मजबूत नेतृत्व, संवेदनशील सरकार, सुरक्षित भारत। 

✍ लेखक – दयानंद झा 
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