डिजिटल इंडिया बनाम जमीनी हकीकत: विकास की दो तस्वीरें
भारत आज दुनिया के सामने एक डिजिटल ताकत के रूप में उभर रहा है। ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल सेवाएँ, सरकारी पोर्टल, आधार आधारित पहचान प्रणाली और मोबाइल इंटरनेट की पहुँच ने देश को नई दिशा दी है। “डिजिटल इंडिया” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक बड़े परिवर्तन की प्रक्रिया है। आज गांव से लेकर शहर तक लोग UPI के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खातों में पहुँच रहा है। ऑनलाइन शिक्षा और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं ने दूर-दराज के इलाकों तक पहुँच बनाई है। यह तस्वीर भारत को आधुनिक और आत्मनिर्भर दिखाती है। लेकिन दूसरी ओर जमीनी हकीकत भी है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी इंटरनेट की गति धीमी है या नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण कई लोग ऑनलाइन सेवाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पाते। बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे नागरिकों के लिए डिजिटल प्रक्रिया कभी-कभी जटिल बन जाती है। सरकारी पोर्टल और ऑनलाइन सिस्टम शुरू तो हो जाते हैं, लेकिन कई बार तकनीकी खामियों या सर्वर की समस्या के कारण आम नागरिक को परेशानी झेलनी पड़ती है। लंबी लाइनें कम हुई हैं, पर डिजिटल कतारें अभी भी बनी रहती हैं। य...