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NEET UG पुनर्परीक्षा 2026 में बड़ा खुलासा: स्टेट टॉपर, मेडिकल छात्र और बायोमेट्रिक कर्मियों समेत कई गिरफ्तार

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शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला 21 जून 2026 को आयोजित NEET UG पुनर्परीक्षा के दौरान बिहार के लखीसराय जिले से एक ऐसे संगठित सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जिसने देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि कई अभ्यर्थी वास्तविक उम्मीदवारों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे थे। इस पूरे मामले में मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों, मूल अभ्यर्थियों, सहयोगियों तथा बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े कर्मियों की कथित संलिप्तता सामने आई है। कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा? लखीसराय जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं। इसके बाद केंद्राधीक्षकों, फ्लाइंग स्क्वॉड, स्टैटिक टीम तथा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से जांच शुरू की गई। जांच के दौरान केंद्रीय विद्यालय, केआरके उच्च विद्यालय तथा उच्च विद्यालय हसनपुर समेत विभिन्न परीक्षा केंद्रों से कई संदिग्ध अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया। जब उनके दस्तावेजों, पहचान पत्रों और बायोमेट्रिक विवरण...

🌸प्रेम का अदृश्य सहारा | आज की बोध कथा | रिश्तों में सम्मान और अपनत्व का महत्व 🌸

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💐 प्रेम का अदृश्य सहारा 💐 जीवन में प्रेम केवल बड़े-बड़े त्यागों या महंगे उपहारों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी भावनाओं, सम्मान और अपनत्व से जीवित रहता है। यह कथा हमें रिश्तों की उसी सुंदरता का संदेश देती है। एक छोटे से शहर में मोहनलाल जी और उनकी पत्नी सरला देवी रहते थे। दोनों की आयु ढलान पर थी, लेकिन उनके रिश्ते में प्रेम, सम्मान और विश्वास की मिठास आज भी बरकरार थी। उनका जीवन सादगी और आपसी समझ का सुंदर उदाहरण था। उनके पड़ोस में रहने वाले नवविवाहित दंपति राहुल और नेहा उन्हें अपने दादा-दादी के समान मानते थे। वे प्रत्येक रविवार उनके घर जाकर उनका हालचाल पूछते और कुछ समय उनके साथ बिताते थे। राहुल ने एक बात कई बार देखी। जब भी सरला देवी चाय या कॉफी बनातीं, किसी भी बोतल या डिब्बे का कड़ा ढक्कन खोलने के लिए मोहनलाल जी को आवाज़ देतीं। मोहनलाल जी मुस्कुराते हुए ढक्कन खोल देते और फिर अपने काम में लग जाते। राहुल को लगा कि बढ़ती उम्र के कारण सरला देवी को यह काम करने में कठिनाई होती होगी। एक दिन वह बाजार से एक विशेष उपकरण खरीद लाया, जिसकी सहायता से कोई भी व्यक्ति आसानी से कड़ा ढक्कन खोल सकता था। अगले रव...

🌿 कटहल का बाग – भक्त और भगवान की अद्भुत लीला 🌿

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॥ ॐ श्रीजगन्नाथाय नमः ॥ जगन्नाथपुरी के सिंहद्वार के समीप भगवान श्रीजगन्नाथ के परम भक्त रघुदास जी निवास करते थे। वे वहाँ के राजा के गुरु भी थे। उनकी भक्ति इतनी निष्कपट और गहन थी कि स्वयं भगवान श्रीजगन्नाथ बालक रूप में उनके पास आया करते थे। दोनों के बीच सख्य भाव (मित्रता का प्रेम) था, जिसे पुरी के अनेक लोग जानते थे। एक दिन भगवान श्रीजगन्नाथ बाल रूप में रघुदास जी के पास आए और मुस्कुराते हुए बोले— "राजा का इतना बड़ा कटहलों का बगीचा है, फिर भी मुझे कभी कटहल का भोग नहीं लगाया जाता। आज मेरा मन पका हुआ कटहल खाने का है। चलो, आज हम राजा के बगीचे से कटहल चुराकर लाते हैं।" रघुदास जी ने विनम्रता से कहा— "प्रभु! मैं राजा को आपकी इच्छा बता दूँगा और कल ही कटहल मंगवाकर आपको भोग लगा दूँगा।" भगवान हँसते हुए बोले— "तुम तो जानते हो, माता यशोदा के घर में माखन की कोई कमी नहीं थी, फिर भी मैं पूरे गोकुल में माखन चुराकर खाता था। चुराकर खाने का आनंद ही कुछ और होता है। चलो, आज रात कटहल चुराते हैं।" रात होने पर दोनों चुपचाप राजा के बगीचे में पहुँचे। भगवान ने रघुदास जी से कहा— "मै...

🔱 हनुमान की परीक्षा — जब महादेव ने अपने ही रुद्र अंश को परखा 🔱

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एक अपमान... एक परीक्षा... और हनुमान ने दिखा दिया कि असली शक्ति सेवा में है, अहंकार में नहीं! 🕉️ भूमिका: जब भगवान ने अपने ही अंश को परखा सृष्टि में अनेक रिश्ते हैं—माता-पिता का, गुरु-शिष्य का, मित्रता का और भक्ति का। लेकिन एक रिश्ता ऐसा भी है, जो दिखाई नहीं देता, फिर भी सबसे शक्तिशाली होता है— महादेव और उनके रुद्र अंश, श्री हनुमान का। हनुमान केवल प्रभु श्रीराम के परम भक्त ही नहीं थे, बल्कि स्वयं भगवान शिव के अंशावतार माने जाते हैं। किन्तु एक प्रश्न था— क्या उनके भीतर का रुद्र पूर्णतः प्रभु राम के चरणों में समर्पित हो चुका है? क्या अपमान और क्रोध की अग्नि में भी उनकी विनम्रता अटल रह सकती है? इसी सत्य को परखने के लिए महादेव ने एक अद्भुत लीला रची... 🌙 आधी रात का अतिथि लंका विजय के पश्चात जब श्रीराम और उनके सहयोगी विश्राम कर रहे थे, तब पूरा वातावरण उत्सव में डूबा हुआ था। किन्तु एक सेवक ऐसा था जो अभी भी जाग रहा था— पवनपुत्र हनुमान। वे अपने प्रभु की सेवा और सुरक्षा में तत्पर खड़े थे। तभी आधी रात को एक अत्यंत वृद्ध साधु द्वार पर आया। उसका शरीर थर-थर कांप रहा था, वस्त्र फटे ह...

🌺 भैरव सेठ की कथा — अहंकार से भक्ति तक की दिव्य यात्रा 🌺

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समय बीतता गया। भैरव सेठ का जीवन अब पहले जैसा नहीं रहा था। कभी जिस व्यक्ति के नाम से पूरा बाजार कांपता था, आज वही व्यक्ति सुबह सबसे पहले मंदिर की सीढ़ियां धोता था। जो हाथ कभी गरीबों को धक्का देते थे, वही हाथ अब भूखों को भोजन परोसते थे। लोग उसे देखकर हैरान होते थे। कई लोगों को विश्वास ही नहीं होता था कि यह वही भैरव सेठ है जिसने कभी अहंकार में भगवान के भक्तों का अपमान किया था। लेकिन भगवान की लीला अभी समाप्त नहीं हुई थी। 🌼 भक्ति की ओर पहला परिवर्तन एक दिन भैरव सेठ मंदिर के प्रांगण में बैठा था। उसके सामने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के दिव्य विग्रह विराजमान थे। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। वह मन ही मन कह रहा था— “प्रभु, आपने मेरा धन ले लिया, मेरा अभिमान तोड़ दिया, मेरा झूठा वैभव छीन लिया। लेकिन बदले में मुझे आपका सच्चा मार्ग दिखा दिया। अब मेरे जीवन में और क्या शेष है?” उसी रात उसे एक अद्भुत स्वप्न दिखाई दिया। पूरा नीलाचल दिव्य प्रकाश से जगमगा रहा था। शंखों की ध्वनि गूंज रही थी। हजारों दीपक जल रहे थे। उस दिव्य प्रकाश के मध्य स्वयं भगवान जगन्नाथ खड़े थे। प्रभु मुस्कुराकर ...

🌺🙏 भगवान जगन्नाथ और निर्धन मूर्तिकार रामू की अद्भुत कथा 🙏🌺

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कहते हैं कि भगवान अपने भक्त की परीक्षा अवश्य लेते हैं, लेकिन उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते। यह कथा है एक ऐसे निर्धन मूर्तिकार की, जिसे संसार ने चोर समझा, पर स्वयं भगवान जगन्नाथ ने उसे अपना प्रिय मित्र घोषित कर दिया। ✨ रामू नाम का एक गरीब मूर्तिकार था। उसकी छोटी सी झोपड़ी में गरीबी थी, संघर्ष था, भूख थी, लेकिन उसके हृदय में भगवान जगन्नाथ के प्रति अटूट श्रद्धा थी। पत्नी का देहांत हो चुका था और उसकी पूरी दुनिया उसका छोटा बेटा कान्हा था। दिन-रात मेहनत करके वह लकड़ी की सुंदर मूर्तियाँ बनाता था, लेकिन लगातार बारिश के कारण उसकी कोई मूर्ति नहीं बिक रही थी। उधर उसका बेटा तेज बुखार से तप रहा था। घर में न भोजन बचा था, न दवा के पैसे। एक दिन रामू अपनी सबसे सुंदर बनाई हुई भगवान जगन्नाथ की मूर्ति लेकर मंदिर पहुँचा। उसे विश्वास था कि कोई भक्त मूर्ति खरीद लेगा और उसके बेटे का उपचार हो जाएगा। लेकिन किसी ने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया। उल्टा मंदिर का घमंडी रक्षक विक्रम उसे अपमानित करते हुए सीढ़ियों से धक्का दे बैठा। रामू की मूर्ति टूटकर बिखर गई। आँखों में आँसू भरकर उसने मंदिर के शिखर की ओर देखा और कहा— ...

नदी: भगवान विष्णु के नेत्रों से अवतरित पावन धारा और अयोध्या की जीवनरेखा

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🌊 सरयू नदी का दिव्य उद्गम भारतीय सनातन परंपरा में सरयू नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सरयू का जन्म किसी साधारण स्रोत से नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु के नेत्रों से हुआ था। कथा के अनुसार, एक समय भगवान विष्णु के नेत्रों से आनंदाश्रु प्रवाहित हुए। ब्रह्माजी ने उन दिव्य अश्रुओं को एकत्र कर पवित्र मानसरोवर में सुरक्षित रखा। कालांतर में अयोध्या के आदि राजा वैवस्वत मनु ने कठोर तपस्या की और महामुनि वशिष्ठ की कृपा से उस दिव्य जलधारा को पृथ्वी पर लाया गया। चूंकि यह जल 'सर' अर्थात झील से निकला था, इसलिए इसका नाम पड़ा— सरयू। --- 🏛️ अयोध्या और सरयू का अटूट संबंध सरयू नदी को अयोध्या की आत्मा कहा जाता है। भगवान श्रीराम के जीवन की अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं की साक्षी यह पावन नदी रही है। 👶 श्रीराम की बाल लीलाएं रामायण परंपरा के अनुसार भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न ने अपने बाल्यकाल का एक बड़ा हिस्सा सरयू तट पर खेलते हुए और ऋषियों के सान्निध्य में बिताया। सरयू के तट पर ...

चित्रकूट में तुलसीदास जी को श्रीराम के साक्षात दर्शन: भक्ति, प्रेम और प्रभु-कृपा का अद्भुत प्रसंग

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जब साक्षात सामने खड़े भगवान को भी भक्त पहचान न पाए, तब प्रभु ने स्वयं अपनी कृपा से दर्शन देकर भक्त की तड़प को पूर्ण किया। चित्रकूट के रामघाट से जुड़ा यह लोकप्रचलित धार्मिक प्रसंग गोस्वामी तुलसीदास जी की अनन्य भक्ति और हनुमान जी की कृपा का अनुपम उदाहरण माना जाता है। > नोट: यह कथा हिंदू परंपरा में प्रचलित एक श्रद्धा-आधारित धार्मिक प्रसंग है, जिसे भक्तिभाव से सुनाया और पढ़ा जाता है। --- प्रभु-दर्शन की तीव्र अभिलाषा गोस्वामी तुलसीदास जी का संपूर्ण जीवन भगवान श्रीराम की भक्ति को समर्पित था। उनके हृदय में अपने आराध्य प्रभु के साक्षात दर्शन की तीव्र इच्छा थी। कहा जाता है कि उनकी इस व्याकुलता को देखकर काशी में स्वयं हनुमान जी ने उन्हें संकेत दिया कि चित्रकूट के रामघाट पर प्रभु के दर्शन संभव हैं। हनुमान जी की आज्ञा प्राप्त होते ही तुलसीदास जी चित्रकूट पहुंचे और मंदाकिनी नदी के तट पर एक कुटिया बनाकर प्रभु की प्रतीक्षा में साधना करने लगे। --- पहला अवसर: जब प्रभु को पहचान न सके एक दिन तुलसीदास जी चित्रकूट की परिक्रमा कर रहे थे। तभी उन्होंने मार्ग में दो अत्यंत तेजस्वी और सुंदर राजकुमारों ...