⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: झूठी FIR पर सख्त रुख
कोर्ट ने साफ कहा:
✅ अगर जांच में FIR झूठी पाई जाती है, तो जांच अधिकारी (IO) का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह शिकायतकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करे।
✅ यह कार्रवाई Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) की धारा 215(1)(a) के तहत अनिवार्य है।
✅ यदि IO कार्रवाई नहीं करता, तो उसके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही हो सकती है।
🚨 झूठी FIR कराने वालों के लिए चेतावनी
🔴 झूठी शिकायत दर्ज कराना अब आसान नहीं।
🔴 दोषी पाए जाने पर कानूनी मुकदमा, सजा और जुर्माना हो सकता है।
🔴 न्यायालय ने स्पष्ट किया — कानून का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं होगा।
संदेश स्पष्ट है:
न्याय व्यवस्था को गुमराह करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
झूठी FIR अब सिर्फ शिकायतकर्ता के लिए ही नहीं, बल्कि कार्रवाई न करने वाली पुलिस के लिए भी जोखिम बन गई है।
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