⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: झूठी FIR पर सख्त रुख

 Allahabad High Court ने 14 जनवरी 2026 को Umme Farva vs. State of Uttar Pradesh and Another (2026) मामले में झूठी FIR को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

कोर्ट ने साफ कहा:

✅ अगर जांच में FIR झूठी पाई जाती है, तो जांच अधिकारी (IO) का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह शिकायतकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करे।

✅ यह कार्रवाई Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) की धारा 215(1)(a) के तहत अनिवार्य है।

✅ यदि IO कार्रवाई नहीं करता, तो उसके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही हो सकती है।

🚨 झूठी FIR कराने वालों के लिए चेतावनी

🔴 झूठी शिकायत दर्ज कराना अब आसान नहीं।

🔴 दोषी पाए जाने पर कानूनी मुकदमा, सजा और जुर्माना हो सकता है।

🔴 न्यायालय ने स्पष्ट किया — कानून का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं होगा।

संदेश स्पष्ट है:

न्याय व्यवस्था को गुमराह करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

झूठी FIR अब सिर्फ शिकायतकर्ता के लिए ही नहीं, बल्कि कार्रवाई न करने वाली पुलिस के लिए भी जोखिम बन गई है।

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